अल्बर्ट आइंस्टीन केअनमोल वचन क्या बोले थे गांधीवाद पर?जानें

0
969
92 / 100

अल्बर्ट आइंस्टीन विश्व के सबसे बुद्धिमान लोगों की सूची में विशेष स्थान रखते हैं.भौतिक विज्ञान की दुनियां में उन्होंने जो उन्होंने खोज की ,वो आधुनकि भौतिक विज्ञान की रीढ़ बन गयी.आज उनके खोज और समीकरणों पर न लिखते हुए यहां उनके विचारों की एक श्रंखला प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है.

अल्बर्ट आइंस्टीन कुछ हद तक गाँधीवाद से सहमत थे ,लेकिन जिस तरह गांधी ने पूना पैक्ट पर अपना रवैया अपनाया उस प्रवृत्ति को आइंस्टीन अस्तित्व के मूल अधिकारों का हनन समझते हैं.

नोबेल विजेता अल्बर्ट आइंस्टीन

संक्षेप में इतना ही कि उनको प्रकाश विधुत प्रभाव (Photo electric effect) की खोज के लिए 1921 में नोबेल पुरस्कार से सम्मनित किया गया.जिंदगी के विभिन्न पहलुओं पर जानते हैं उनके विचार-

अल्बर्ट आइंस्टीन
अल्बर्ट आइंस्टीन

अंतरात्मा:-

यदि संघ कहे तो भी व्यक्ति को अंतरात्मा के विरुद्ध कोई कार्य नहीं करना चाहिए.


ये भी पढ़े शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार क्यों दिया जाता है —https://thepowerofpen.in/शांति-स्वरूप-भटनागर/

महात्मा गांधी के विषय में क्या राय थी अल्बर्ट आइंस्टीन  की जानें सच
महात्मा गांधी

गांधीवाद के विषय में क्या कहा अल्बर्ट आइंस्टीन ने:

अल्बर्ट आइंस्टीन ने गांधीवाद का कुछ शर्तों के साथ समर्थन किया है.लेकिन अधिकांश फैसलों में वे गांधी जी से पूर्ण रूप से सहमत नहीं हैं.

  • मेरा विश्वास है कि अधिराष्ट्र आधार पर विश्व में शांति स्थापित करने की समस्या बृहद स्तर पर गांधी के तरीके अपनाकर ही सुलझाई जा सकती है.
  • मेरे विचार गांधी के विचारों से लगभग मेल खाते हैं .किंतु यदि मुझसे या मेरे लोगों से अस्तित्व के मूल -आधार का हनन करने अथवा उसे छीनने का प्रयास किया जाएगा तो मैं (व्यक्तिगत एवं सामूहिक रूप से) हिंसा के साथ उसका विरोध करँगा.
  • ऐसी सभी परिस्थियों में ,जहां समस्याओं का तर्कसंगत समाधान संभव है ,मैं ईमानदारी के साथ समन्वय को पसंद करता हूँ और यदि मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा करना संभव नहीं है तो अन्याय के विरुद्ध गांधी का शांतिपूर्ण विरोध पसंद करता हूँ.
  • गांधी के असहयोग के संदर्भ में मुझे असहयोग का केवल क्रांतिकारी स्वरूप दिखाई पड़ता है.

अंतराष्ट्रीय संस्था:

  • यदि हमारी पृथ्वी पर स्थित अंततः असहनीय हो जाये तो मुझे विश्वास है कि एक अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक संस्था केवल संभव ही नहीं, अपितु अप्रतिबंधित रूप से आवश्यक भी होगी.

अत्याचार:

कोई व्यक्ति यदि लोगों के समूह पर अत्याचार करने में प्रसन्नता अनुभव करता है तो यह बात, मेरे लिए उस व्यक्ति से घृणा करने के लिए पर्याप्त कारण है.

अध्यात्म :

  • यदि मनुष्य आध्यात्मिक संचलन एवं उसके विकास को समझना चाहता है तो उसे यह याद रखना होगा कि मानव जाति ने जो भी किया सोचा है, वह सब गहन आवश्यकताओं की पूर्ति तथा दर्द के निवारण से संबंधित है .
  • मैं पूर्णता इस बात से आश्वस्त हूं कि व्यक्ति को आध्यात्मिक चीजों से विशुद्धानंद तभी प्राप्त हो सकता है ,यदि वे चीजें उसकी आजीविका कमाने से संबंधित ना हो.

अनुभव:

  • बच्चे अपने माता-पिता के जीवन के अनुभवों पर ध्यान नहीं देते तथा इसी प्रकार राष्ट्र भी इतिहास की उपेक्षा करते हैं.बुरे पाठ सदैव नए सिरे से सीखने पढ़ते हैं.

अल्बर्ट आइंस्टीन अपने बारे में

einstin
  • मैं इस भ्रम में ही रहना चाहता हूँ कि मेरा विश्लेषण नहीं किया गया है.
  • मुझे विश्वास है,मेरा वैज्ञानिक लक्ष्य तथा मेरा व्यक्तिगत स्वाभिमान मुझे किसी भी गौण कार्य को स्वीकार करने से नहीं रोकेगा.
  • मेरी भयंकर वेष-भूषा के बावजूद मेरे जीवन में पूर्ण सामंजस्य है;मैं ऐसे दूरदर्शी व्यक्ति की भाँति हूँ, जो विस्तृत क्षितिज से आकर्षित होकर अपने सामने की भूमि से तब व्यथित हो जाता है ,जब कोई वस्तु उसकी दृष्टि को बाधित कर देती है.
  • विरासत से मैं यहूदी हूँ, नागरिकता की दृष्टि से स्विस तथा स्वभाव से मनुष्य और सिर्फ एक मनुष्य. मेरा किसी राष्ट्र या राष्ट्रीयता से कोई विशिष्ट लगाव नहीं है.

आइंस्टीन की रुचि और सोच

अल्बर्ट आइंस्टीन वैज्ञानिक से कहीं ज्यादा एक दार्शनिक भी रहे है.उनकी सोचने -समझने और परखने की शक्ति उनको एक विलक्षण प्रतिभा के व्यक्ति बनाते हैं.उनकी हॉबी क्या थी और क्या बन गए जानें उन्हीं के शब्दों में

  • मैं शुरू से इंजीनियर बनना चाहता था,किंतु अपनी रचनात्मक ऊर्जा को धनोपर्जन के घृणित उद्देश्य से व्यावहारिक एवं रोजमर्रा की जिंदगी को अधिक परिष्कृत करने पर व्यय करने पर व्यय करने का विचार मेरे लिए असहनीय था.
  • मेरे अंदर भावनाओं का नितांत अभाव है;मेरे भीतर सभी लोगों के लिए केवल उत्तरदायित्व का भाव है तथा उन लोगों के प्रति लगाव है,जिन्हें मैं अपना करीबी मानता हूं.
  • यधपि मेरे व्यवसाय में मुझे नियमित रूप से ज्ञान के वृक्ष का सेवन करना चाहिए,तथापि ऐसा में अधिक नहीं कर पाया हूँ.
  • प्रसिद्धि के साथ में अधिकाधिक मूर्ख हो गया हूँ,जो कि स्वाभाविक रूप से अत्यंत सामान्य बात है.

फोटो इलेक्ट्रिक इफेक्ट के बाद:

फोटो इलेक्ट्रिक इफेक्ट के बाद अल्बर्ट आइंस्टीन कहते है-

  • जब से प्रकाश विक्षेप का परिणाम आम हुवा है ,मेरी इस प्रकार उपासना हो रही है कि मैं स्वयं को विधर्मी प्रतिमा जैसा महसूस करने लगा हूँ.यद्यपि यह दौर भी ईश्वर की कृपा से निकल जायेगा.

कला और विज्ञान के विषय में

  • बौद्धिक कार्य के प्रत्येक क्षेत्र में वेशेषज्ञता के कारण बुद्धिमान कर्मचारी तथा गैर -विशेषज्ञ के बीच की खाई बढ़ती जा रही है ,जिसकी वजह से कला तथा विज्ञान में हो रही उपलब्धियों से राष्ट्र का जीवन पोषित व परिष्कृत नहीं हो पा रहा है.
  • मेरे विचार से ,कला और विज्ञान का सर्वाधिक महत्वपूर्ण उद्देश्य इस भावना(जो किसी धर्म सिद्धान्त और किसी ईश्वर को नहीं मानती ) को जागृत करना तथा उन लोगों में जीवित रखना है,जिनके लिये यह ग्राह्य है.
  • लोगों को कल एवं विज्ञान की ओर ले जानेवाला सर्वशक्तिमान उद्देश्य नित प्रतिदिन की शुष्क तथा उबाऊ दिनचर्या से बचना और अपनी रचना की छवियों से भरे जगत में शरण लेना है.अल्बर्ट आइंस्टीन कहते हैं कि महान वैज्ञानिक अच्छे कलाकार भी होते हैं.

मानवता पर आइंस्टीन के विचार:

  • यदि हम चाहते हैं कि मानवता जिवित रहे तो हमें नवीन विचारधारा को अपनाना पड़ेगा.
  • हमें मानवता से कभी निराश नहीं होना चाहिए ,क्योंकि हम स्वयं मनुष्य हैं.
  • सभ्य मानवता की नियति किसी भी अन्य चीज से अधिक इस बात पर निभर्र करती है कि वह कितना नैतिक -बल पैदा करने में समर्थ है.
  • रिक्साचालकों को देखता हूँ तो मुझे मनुष्य के प्रति ऐसे निदयी व्यवहार का हिस्सा होने पर शरमन्दगी महसूस होती है ,पर इसके बारे में कुछ नहीं कह सकता.

सरकारों के बारे में क्या कहते हैं अल्बर्ट आइंस्टीन?

  • कोई भी सरकार अपने आप में एक खतरा है ,क्योंकि उसके भीतर अत्याचारी में परिवर्तित हो जाने की प्रवृत्ति होती है.
  • अच्छी सरकार के बारे में अल्बर्ट आइंस्टीन कहते है- अच्छी सरकार वह होती है ,जो नागरिक को वह सभी अधिक्तम संभव स्वतंत्रता एवं राजनीतिक अधिकार देती है,जो नागरिक के हित में होते हैं.दूसरी ओर संघ को अपने नागरिक को व्यक्तिगत सुरक्षा और थोड़ी आर्थिक सुरक्षा देनी चाहिए.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here