उत्तराखंड प्रतियोगिता पथ :and जनपद चमोली भाग-3 PDF DOWNLOAD

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उत्तराखंड प्रतियोगिता पथ की इस यात्रा में हमने जनपद दर्शन के साथ शुरू की है.अल्फाबेटिक क्रम में हमने अल्मोड़ा जनपद से शुरुवात की थी.इसी क्रम में हम जनपद चमोली पहुंच चुके हैं .चूंकि जनपद चमोली अपने आप में इतनी विशिष्टता और धरोहर समाए हुए है,कि उसका एक आर्टिकल ब्लॉग में पूरा करना संभव नहीं था.इसीलिए हमने पाठकों की सुविधा का ध्यान रखते हुए इसको तीन भागों में तैयार किया है.2 भाग पहले डाल दिये गए हैं.उत्तराखंड प्रतियोगिता पथ का ये सफर जारी है,अगला अंक जनपद देहरादून का होगा.आप इस साइट के साथ बने रहिए आपकी मंजिल का रास्ता www.thepowerofpen .in से होकर ही गुजरेगा.

जनपद चमोली भाग-3

उत्तराखंड प्रतियोगिता पथ जानें पंच प्रयाग (Learn Uttarakhand competition path Panch Prayag )                     

●पंच प्रयाग- राज्य में पांच प्रयाग में से तीन प्रयाग चमोली जिले में है।

विष्णु प्रयाग- अलकनंदा और पश्चिमी धौलीगंगा(विष्णु गंगा) का संगम होता है.

नंदप्रयाग- अलकनंदा और मंदाकिनी नदी का संगम 

कर्ण प्रयाग- पिंडर और अलकनंदा का संगम

● रुद्रप्रयाग- रुद्रप्रयाग जनपद में मंदाकिनी नदी और अलकनंदा  

मंदाकिनी नदी का संगम

देवप्रयाग– टिहरी जनपद में अलकनंदा और भागीरथी का संगम।

  देव भूमि उत्तराखंड पंच बद्री मन्दिर समूह :चमोली:(Dev Bhumi Uttarakhand Panch Badri Temple Group: Chamoli)

बद्रीनाथ-

इसे विशाल बद्री भी कहा जाता है भारत के चार धामों में से एक है .बद्रीनाथ में भगवान विष्णु की पूजा होती है पुराणों में बद्रीनाथ को योग सिद्धा मुक्ति प्रदा बद्रिकाश्रम आदि कहा गया है. नर नारायण पर्वतों के मध्य में है मंदिर प्रतिवर्ष अप्रैल मई के महीने में खुलता है एवं शरद ऋतु में नवंबर की तृतीय सप्ताह के लगभग बंद हो जाता है

● बद्रीनाथ धाम के पुजारी आदि शंकराचार्य के वंशजों में से होते हैं जिन्हें रावल कहा जाता है.

● मंदिर को मुख्यतः तीन भागों में बांटा गया है- सिंहद्वार, मंडल और गर्भ ग्रह। मुख्य प्रतिमा काले रंग की है. खंडित है मूर्ति की खंडित होने का मूल कारण शायद नारद कुंड में पड़े रहना है जिसे शंकराचार्य ने निकाल कर स्थापित करवाया था।

पंचकुंड चमोली

● यहां प्रसिद्ध पांच कुंड हैं- तप्त कुंड, नारद कुंड, सत्यपथ कुंड,त्रिकोण कुंड, और मानुषी कुंड है.

●तप्त कुंड गर्म जल का कुंड है अलकनंदा के पास

● यहां की प्रसिद्ध दर्शनीय शिलाएं- गरुड़ शिला, नारद शिला, मार्कंडेय शिला, नरसिंह शिला और ब्रह्मकपाल शिला।

● प्रमुख गुफाएं- राम गुफा, गरुड़ गुफा और इसके अलावा मुछकुंड गुफा, व्यास गुफा,गणेश गुफा माणा गांव के पास है

● योगध्यान बद्री- पांडुकेश्वर के पास योगध्यान बद्री व पांडव शिला है शीतकाल में कपाट बंद होने पर बद्रीनाथ की चतुर्मुखी मूर्ति यहां लाई जाती है।

बृहद बद्री-

जोशीमठ के पास शंकराचार्य द्वारा भगवान विष्णु की सर्वप्रथम प्रतिमा यही स्थापित की गई अतः इसे प्रथम बद्री भी बोला जाता है

भविष्य बद्री- जुसेन नामक स्थान पर यहां विष्णु के आधी आकृति की पूजा की जाती है.

आदि बद्री- पंच बद्री में से सबसे कम ऊंचाई पर स्थित है आदि बद्री कर्णप्रयाग से 21 किमी की दूरी पर है यहां पर 16 छोटे मंदिर है जिनमें समतल छत वाले मंदिर अत्यधिक प्राचीन है इनकी स्थापना गुप्त काल में की गई

            प्रमुख ग्लेशियर

सतोपंथ ग्लेशियर 

●भागीरथी खर्क ग्लेशियर 

●दूनागिरी 

● बद्रीनाथ 

●हिपरा बामक ग्लेशियर 

●नंदा देवी समूह ग्लेशियर

 प्रमुख मेले / Major Fairs / Festivals

नंदा राजजात यात्रा- यह  यात्रा गढ़वाल और कुमाऊं की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है यह विश्व की अनोखी पदयात्रा 12 वर्षों में एक बार होती है.यह यात्रा चमोली के कासवा गांव के पास नॉटी नामक स्थान में नंदा देवी मंदिर से होमकुंड तक जाती है

● इस यात्रा में सबसे आगे चार सींग वाला मेढा तथा पीछे रिंगाल से निर्मित सुंदर छतौली के लिए लोग चलते हैं इस यात्रा का दूसरा पड़ाव तोप है।

● नंदा देवी के ससुराल क्षेत्र का पहला पड़ाव कुलसारी है जो पूरी यात्रा का 9 वा पड़ाव है यात्रा का 10 वाँ पड़ाव नंदकेसरी जहां पर कुमाऊं के लोग अपनी- अपनी कुलदेवी के साथ यात्रा में शामिल होते हैं 

●रम्माण उत्सव- यह उत्सव चमोली के जोशीमठ ब्लॉक के सलूड गांव में अप्रैल महीने में होता है

● यह उत्सव 11 से 13 दिनों तक मनाया जाता है इसमें पात्र मुखोटे लगाकर नृत्य करते हैं

● इस उत्सव में माल- मल्ल युद्ध नृत्य होता है जो स्थानीय लोगों वह गोरखा के बीच युद्ध का वर्णन करता है

● 2 अक्टूबर 2009 को रम्माण उत्सव यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया।

● नौठा कौथिक- आदि बद्री धाम में मनाया जाता है जो पाषाण युग के लिए प्रसिद्ध है। हिमालय महोत्सव के नाम से जाना जाता है।

चमोली गढ़वाल में वन (Forest movement in Chamoli Garhwal)

● चिपको (Stick movement)

यह आंदोलन 1974 ईस्वी में  चमोली जनपद के रैणी गांव से प्रारंभ हुआ था जिसकी प्रणेता गौरा देवी थी. इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य वनों की अवैध कटाई पर रोक लगाना था.

● चिपको आंदोलन को शिखर तक पहुंचाने का श्रेय सुंदरलाल बहुगुणा एवं चंडी प्रसाद भट्ट को जाता है.

● बहुगुणा जी ने हिमालय बचाओ देश बचाओ का 

नारा दिया।

● मैती आंदोलन(Maiti movement)

यहां आंदोलन 1996 में शुरू हुआ इस आंदोलन के प्रवर्तक ग्वालदम इंटर कॉलेज के शिक्षक कल्याण सिंह रावत थे

● इस कॉलेज की छात्राओं को शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम के दौरान बेदनी बुग्याल में वनों की देखभाल के लिए तल्लीनता से जुटे देखकर श्री रावत ने महसूस किया कि पर्यावरण संरक्षण में युवतियां ज्यादा बेहतर ढंग से कार्य कर सकती हैं .इसी के बाद ही मैती आंदोलन उसका संगठन ने आकार लेना शुरू किया.

● इसी आंदोलन के तहत आज विवाह अवसर पर वर-वधू पौधा रोपते हैं।

● डूंगी- पैंटोली आंदोलन (Dungi-Pantoli Movement)

चमोली जनपद में बाँस के जंगल काटे जाने के विरोध में जनता द्वारा आंदोलन किया

प्रमुख दर्रे(Main pass)

●कालन्दी दर्रा- चमोली और उत्तरकाशी के बीच

माणा, नीति, शलशला, किंगरी-विंगरी, मारही, कियोगाड़आदि दर्रे चमोली व तिब्बत के बीच

● बराहोती, टोपीधुगा,लातुधुरा, मार्चयोक आदि चमोली और पिथौरागढ़ के बीच स्थित है.

चमोली प्रमुख संस्थान (Chamoli Head Institute)

● जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान गोपेश्वर चमोली में।
● राज्य विधि कॉलेज गोपेश्वर चमोली में है
● उत्तराखंड बोली भाषा संस्थान का गठन 2016 चमोली के गौचर में किया गया।
● विवेकानंद युवा केंद्र जोशीमठ में स्थित है.

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