उत्तराखंड सामान्य ज्ञान से:पौड़ी जनपद 100 Main Points

0
824

 


उत्तराखंड सामान्य ज्ञान से सफलता का पथ कैसे प्राप्त करें:

  “ उत्तराखंड सामान्य ज्ञान से ” सीरीज में जनपद पौड़ी का आज सफर करने वाले हैं.अगर आप उत्तराखंड राज्य(Uttarakhand state) की सेवाओं के लिए आवेदन फार्म भरे हैं,तो ये अंक आपके लिए बहुत उपयोगी होने वाला है.अध्य्यन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हमारी टीम ने जनपदवार मैटर को संकलित किया  है.

आज इस सीरीज में आप जनपद पौड़ी(Paudi) गढ़वाल का भाग-1 देखेंगे.छोटे-छोटे खण्डों में बांटकर हमने बेहतर सामान्य ज्ञान का भंडार सजा कर रखा है.बस आपको उस भंडार में से मोतियों को अपने हार में पिरोना है.अब चलते हैं पौड़ी जनपद की ओर और जुटाते हैं ज्ञान की पोटली.

पौड़ी जनपद का इतिहास:(History of Pauri District)

उत्तराखंड सामान्य (Uttarakhand GK)ज्ञान से पूछे जाने वाले प्रश्नों में उत्तराखंड का इतिहास भी अहम टॉपिक होता है.हमने पाठकों की सुविधा के लिए जनपदवार इतिहास के विषय चुने हैं.

    पौड़ी गढ़वाल जनपद का गठन 1840 ईस्वी में हुआ था. 1815 से 1840 तक ब्रिटिश गढ़वाल की राजधानी रही.  1840 में राजधानी श्रीनगर से पौड़ी स्थानांतरित की गई. और पौड़ी को ब्रिटिश गढ़वाल का एक जिला बनाया गया.

स्वतंत्रता के बाद 1969 में पौड़ी को गढ़वाल मंडल का मुख्यालय बनाया गया।

यह नगर समुद्र तल से 1700 मीटर की ऊंचाई पर कंडोलिया पहाड़ी  पर स्थित है यहां का सर्वोच्च शिखर झण्डीधार है।

1992 में पौड़ी को हिल स्टेशन घोषित किया गया।

पौड़ी जनपद का 90% से अधिक इलाका पहाड़ी है।

राशि में एक स्टेडियम का निर्माण किया गया है जो एशिया में दूसरा सबसे ऊंचाई पर स्थित स्टेडियम है।

1960 में पौड़ी से काटकर चमोली जिले की तथा 1997 में रुद्रप्रयाग जिले की स्थापना की गई।

24 दिसंबर 2001 को पौड़ी को देवप्रयाग से पुल से जोड़ गया।

पौड़ी जनपद की भौगौलिक स्थिति (उत्तराखण्ड सामान्य ज्ञान से निहित )

उत्तराखंड सामान्य ज्ञान से जनपद पौड़ी
साभार -eUttranchal  पौड़ी

जनपद का अक्षांशीय विस्तार 29°11′ से 30°15′ उत्तरी अक्षांश तथा 78°10′ से 79°10′ पूर्वी देशांतर तक फैला है।

पौड़ी जिले का क्षेत्रफल 5329 वर्ग किमी है. कंडोलिया पहाड़ी पर स्थित है. इसका मध्यवर्ती भाग शिवालिक श्रेणी के अंतर्गत आता है.

इस जनपद की सीमा उत्तर प्रदेश राज्य से लगती है.

पौड़ी को सर्वाधिक 7 जनपदों की सीमाएं स्पर्श करती हैं.( देहरादून, हरिद्वार, टिहरी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा व नैनीताल जिला)।

गढ़वाल मंडल का एकमात्र जिला उत्तरकाशी जिसकी सीमा पौड़ी से नहीं मिलती है.

 Uttarakhand general knowledge  के लिये  मुख्य दर्शनीय स्थल : जनपद पौड़ी

uttrakhan सामान्य ज्ञान  राज्य के महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थलों के बिना अधूरा रह जाता है।कोई भी भर्ती exam हो उत्तराखंड सामान्य ज्ञान से  जो सवाल पूछे जाते हैं,उनमें राज्य के धार्मिक,और दर्शनीय स्थल भी प्रमुख विषय हैं.

     श्रीनगर

अलकनंदा के तट पर बसा श्रीनगर की स्थापना 1358 में गढ़वाल नरेश द्वारा की गई.( कनिंघम के अनुसार) 1621 में महीपतिशाह के समय तक यह अपने गौरवशाली स्थिति में आ गया .1803 के भूकंप में इस नगर की काफी क्षति हुई. 1790 से 1815 तक गोरखाओं का तथा 1815 से अंग्रेजों का अधिकार रहा.

1894 में गौना झील  के टूटने से अलकनंदा में आई बाढ़ ने इस नगर को तहस-नहस कर दिया  फिर दुबारा नगर को थोड़ा ऊंचाई में बसाया ।

1940 में अंग्रेजों ने यहां से राजधानी पौड़ी स्थानांतरित कर दी स्वतंत्रता के बाद यह पौड़ी जिले का अंग बना।

मथेला गांव श्रीनगर  माधव सिंह भंडारी से संबंधित है।

शंकर मठ श्रीनगर में स्थित है इसका निर्माण आदि गुरु शंकराचार्य ने किया।

श्रीनगर में श्रीयंत्र शिला (टापू) और केशव राय मठ स्थित है

प्रसिद्ध गोला बाजार यही स्थित है.

कोटद्वार

गढ़वाल का प्रवेश द्वार कहा जाता है यहां पौड़ी गढ़वाल जिले का एकमात्र रेलवे स्टेशन है यह नगर खोह नदी के तट पर है।

1904 में खोह नदी में भीषण बाढ़ से कोटद्वार शहर तबाह हो गया तथा 1917 में नए कोटद्वार का निर्माण किया गया।

कोटद्वार को स्टील सिटी ऑफ उत्तराखंड की भी कहा जाता है।

कोटद्वार को 1901 में  नगर का दर्जा दिया गया.

पौड़ी जिले में स्थित प्रमुख शिक्षण और प्रशासनिक संस्थान:

हेमंती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय की स्थापना यहां 1973 ईस्वी में गढ़वाल विश्वविद्यालय नाम से हुई।

गढ़वाल विश्वविद्यालय का नाम अप्रैल 1989 को हेमंती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय किया गया।

हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय को 15 जनवरी 2009 केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया तब से इसे हेमंती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है।

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी(N.I.T) की स्थापना 2009 में श्रीनगर में की गई।

वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना 7 जुलाई 2008 को श्रीनगर हुई।

उच्च स्तरीय पौध संस्थान श्रीनगर में स्थित है. 1979 को गढ़वाल यूनिवर्सिटी के अंतर्गत  स्थापित किया गया तथा 23 अप्रैल 1990 से स्वायत्त निकाय है.

मौलाराम चित्र संग्रहालय श्रीनगर में है.

हिमालय पुरातत्व एवं संग्रहालय की स्थापना 1980 में श्रीनगर गढ़वाल विश्वविद्यालय में की गई.

प्राविधिक शिक्षा निदेशालय श्रीनगर में स्थित है.

उत्तराखंड सामान्य ज्ञान से जनपद पौड़ी भाग-01 पीडीएफ यहां से डाउनलोड कर सकते हैं.

ये भी पढ़े:

स्वामी विवेकानंद के शिक्षा और धर्म पर top 10 विचार क्या हैं?

 


Conclusion

प्रिय पाठक गण आपको ये अंक”उत्तराखंड सामान्य  ज्ञान से”कैसा लगा ?अपनी राय और सुझाव अवश्य दें.आपके सुझाओं से हम इस प्रतियोगिता पथ को और अधिक सुगम बना सकें.आगला अंक पढ़ना न भूलें .पौड़ी जनपद के भाग-02


 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here