भारत के प्रथम दलित राष्ट्रपति K.R.Narayanan की कुछ अनोखी बातें

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27 अक्टूबर को भारत के 10 वें राष्ट्रपति K.R.NARAYANAN (कोच्चेरील रामन नारायणन) का जन्म दिन होता है. देश के राष्ट्रपतियों की सूची में उनका स्थान बेशक10 वां है .लेकिन भारत की जातिवादी व्यवस्था में वे भारत के प्रथम दलित राष्ट्रपति हैं.इससे जग जाहिर होता है कि भारत में जातिवाद कभी भी,कहीं भी ,कैसे भी पीछा नहीं छोड़ती है.और इसी वर्णव्यवस्था के शिकार  हुुुए थे के0आर0 नारायणन

भारत के प्रथम दलित राष्ट्रपति का जीवन परिचय और शिक्षा:

राष्ट्रपति के0आर0 नारायणन(K.R.NARAYANAN)  का जन्म 27 अक्टूबर  सन1920 को  केरल के त्रावणकोर  में हुवा था.इनका परिवार अत्यंत गरीब था .श्री नारायणन अपने 7 भाई-बहनों में चौथे नम्बर के थे.इनके पिता केचेरीविट्ठल रमन वैद्य था.और माता का नाम  पाप्पी अम्मा था.इनका पूरा नाम कोच्चेरील रामन नारायणन है.

भारत के प्रथम दलित राष्ट्रपति केआर नारायणन

प्रारंभिक शिक्षा:

इनकी आरंभिक शिक्षा ( पांचवी से आठवीं तक) आवर लेडी ऑफ लॉर्ड  स्कूल से हुई.

हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट की शिक्षा:

श्री के0 आर0 नारायणन ने सेंट मरीज ब्वायज हाईस्कूल कोराविलँगड से दशवीं और इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की.इंटरमीडिएट के बाद इनको पढ़ाई जारी रखने के लिए स्कॉलरशिप मिली.

स्नातक और पोस्टग्रेजुएट की डिग्री:

के0 आर0 नारायणन ने त्रावणकोर विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में पोस्टग्रेजुएट किया और विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया.

 के0 आर0 नारायणन जब हुए थे जातिवाद का शिकार:

त्रावणकोर विश्वविद्यालय  के महाराजा कालेज में अंगेजी प्रवक्ता पद के लिए इन्होंने आवेदन किया .वहां के दीवान C.P.रामास्वामी अय्यर ने उनको  प्रवक्ता पद के बजाए क्लर्क पद के लिए चुना.उनका मानना था कि एक दलित शुद्र विश्वविद्यालय में प्रवक्ता कैसे बन सकता है?जबकि नारायणन उस पद के लिए पूर्ण योग्यता रखते थे.जातिवाद की इस ठोकर से उनको बहुत दुःख हुआ.क्लर्क की नौकरी नहीं स्वीकार की.और दिल्ली चले आये.

नहीं ली B.A की डिग्री:

सिर्फ के0 आर0 नारायण ही नहीं हैं,भारत के प्रथम दलित महापुरूष  जिनको जातिवाद का अपमान सहना पड़ा हो.त्रावणकोर विश्वविद्यालय(अब केरल विश्वविद्यालय) में जातिगत भेदभाव के कारण प्रवक्ता पद नहीं मिलने से वे बहुत क्षुब्ध हो गए.कुछ दिनों बाद जब विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह हुवा तो उन्होंने B.A की डिग्री लेने से इनकार कर दिया.मजे की बात येे है  कि उपराष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने डिग्री ली.

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पत्रकार से राष्ट्रपति तक :

 राष्ट्रपति  के0आर0 नारायणन ने अपना सफर एक पत्रकार के तौर पर आरंभ किया.उन्होंने कई समाचार पत्रों में काम किया जिनमें “द हिन्दू”द टाइम्स ऑफ india”,economic weekly for commerce industries .आदि प्रमुख  हैं .

डॉ0 अंबेडकर से एक मुलाकात:

रोजगार की तलाश में वे दिल्ली चले आये.जहां 1948 में उनकी मुलाकात बाबा साहेब डॉ0 भीमराव अंबेडकर से हुई.डॉ अंबेडकर उस वक्त वक्त कानून मंत्री थे.के0आर0 नारायणन के गुरु , प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हेराल्ड लास्की  तथा बाबा साहेब के कहने पर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनको भारतीय इंडियन ओवरसीज सेवा(अब विदेश मंत्रालय) में नियुक्त कर दिया.

के0आर0 नारायणन की प्रशासक के रूप में सेवाएं:

किसको पता था कि एक गरीब परिवार में पैदा हुवा व्यक्ति इतनी तरक्की  करेगा.जिसके ऊपर जातिवाद का तमगा लगा हो ,और वो एक दिन देश का प्रथम नागरिक बन जायेगा.

1949 में केआर  नारायणन को जवाहरलाल नेहरू ने   भारतीय विदेश सेवा (IFS)  में नियुक्त किया. उन्होंने वर्मा , जापान, ब्रिटेन, कैनबरा, और हनोई में भारत के  राजनयिक  रूप में  अपनी सेवाएं दी.

आपको  ऑस्ट्रेलिया में भारत के पहले उच्चायुक्त होने का गौरव हासिल है.इसके अतिरिक्त आप हनोई नें भारत के महावणिज्यिक दूत भी रहे.

 राजदूत के रूप में के0आर0 नारायणन:

  • 1967 से  1969 तक थाईलेंड में भारत के राजदूत रहे.
  • सन 1973 से 75 तक तुर्की में राजदूत रहे .
  • मई 1976 से 1978 तक चीन में भारत के राजदूत रहे.
  • 1980 से 1984 तक USA में भारत के राजदूत रहे

1978 में भारत के प्रथम दलित भावी राष्ट्रपति विदेश सेवा  से सेवानिवृत्त हो गए

JNU के कुलपति K.R.NARAYANAN:

भारतीय विदेश सेवा से सेवानिवृत्त के बाद के0आर0 नारायणन को 1979 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का कुलपति  नियुक्त किया गया.वे इस पद और 3 जनवरी 1979 से 14 अक्टूबर 1980 तक कार्यरत रहे.उनकी कार्यक्षमता को देखते हुए 1955 में देश के प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू जी ने कहा था”केआर नारायणन देश के सर्वश्रेष्ठ राजनयिक थे”.

राजनीतिक सफर:

केआर नारायणन इंदिरा गांधी के अनुरोध पर राजनीति में आये.वे 3 बार लगातार लोकसभा का चुनाव जीते.

  1. 1984 Ottapalam constituency Pakadkar ,Keral
  2. 1989 Ottapalam constituency Pakadkar ,Keral
  3. 1991 Ottapalam constituency Pakadkar ,Keral

 उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति के रूप में:

27 october 1992 से 24 जुलाई 1997 तक उपराष्ट्रपति रहे.

25 जुलाई 1997 से 25 जुलाई 2002 तक भारत के 10वें राष्ट्रपति रहे.पहले दलित व्यक्ति थे जो इस पद तक पहुंचे.

वैवाहिक जीवन:

केआर नारायणन जब बर्मा(म्यांमार) की राजधानी रंगून में थे,तब उनकी मुलाकात बर्मी लड़की Tinn-Tinn  से हुई.8 जून 1951 को इनक विवाह हो गया.विवाह के बाद Tinn-Tinn ने अपना नाम उषा नारायणन रख लिया.

इनकी दो बेटियां चित्रा और अमृता है.

राष्ट्रपति के रूप में उनके  प्रमुख निर्णय:

केआर नारायणन के प्रमुख निर्णय इस प्रकार हैं-

देेश में sc,st,obc वर्ग के लिए सुप्रीम कोर्ट में जज बनने के अवसर खोले.

केआर नारायणन के राष्ट्रपति बनने से पहले ये व्यवस्था थी कि- सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट के मुख्यन्यायाधीश राष्ट्रपति को 10 व्यक्तियों के पैनल की सूची भेजते थे,जिस पर राष्ट्रपति आंख बंद कर साइन कर देते थे. देश के तत्कालीन मुख्यन्यायाधीश A.S.ANAND (10-10 1998 से 11-01-2001) ने भी राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए 10 व्यक्तियों की लिस्ट भेजी. मगर केआर नारायणन भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे जिन्होंने इस पर हस्ताक्षर करने से पूर्व सवाल किया उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्यन्यायाधीश से पूछा:”क्या  देशभर में इन 10 व्यक्तियों के पैनल में sc,st,obc का कोई योग्य व्यक्ति नहीं मिला”?तब ये मुद्दा बहुत गरमाया था.उनके इस निर्णय से देश के दलितों के लिए सुप्रीम कोर्ट में जज बनने के दरवाजे  खुले.

उत्तरप्रदेश में राष्ट्रपति शासन

तत्कालीन यूपी सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन को लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले को पुनर्विचार के लिए लौटा दिया.इससे उन्होंने ये यह धारणा बदल दी कि भारत का राष्ट्रपति मात्र रवर स्टम्प होता है.

11 वीं लोकसभ को भंग करने का निर्णय भी काफी साहसी कदम था.

केआर नारायणन के बारे में अन्य जानकारियां.

  • 1998में “वर्ल्ड स्टेट्समैन”का पुरस्कार मिला.
  • देश के पहले राष्ट्रपति थे जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के स्वर्ण जयंती समारोह की अध्यक्षता की .और 1998 के देश के आम चुनाव में,राष्ट्रपति पद पर रहते हुए मतदान करने वाले पहले भारतीय राष्ट्रपति बने, जो एक नई मिसाल बनी.
  • K.R.NARAYANAN  पहले उपराष्ट्रपति थे जिनके कार्यकाल में 4 प्रधानमंत्री बने थे-1-नरसिम्हा राव

2-अटल बिहारी बाजपेयी

3-एच डी देवगौड़ा

4-इन्द्र कुमार गुजराल

  • केआर नारायणन भारत के पहले ऐसे राष्ट्रपति हैं,जो अपने कार्यकाल में किसी भी पूजा स्थल में नहीं गए.उनका सिद्धांत था कि वे किसी भी मन्दिर,मस्जिद या अन्य पूजा स्थलों पर नहीं जायँगे.चाहे देवी का हो या देवता का.इससे ये सिद्ध होता है कि वे अंधविश्वास को नहीं मानते थे.

     रचनाएं:

तीन किताबें  प्रमुख हैं

  1. इमेजेस एंड इनसाइडस (Images and insides)
  2. India and America : Essese in understanding.
  3. Non Allianment in contemporary international relations.

मृत्यु(Death)

एक कुशल प्रशासक और कुशल रसजनीतिज्ञ केआर नारायणन का 9 नवंबर 2005 को निधन हो गया.


    मूल्यांकन:


केआर  नारायणन पहले राष्ट्रपति जिन्होंने देश को राष्ट्रपति के पद की महत्वत्ता का आभास कराया.कई कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में भी उन्होंने धैर्य से निर्णय लिए.

वे डॉ0 अंबेडकर के नक्से -कदम पर  चलते रहे.उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने हर मंच से दलितों,पिछड़ो,आदिवासियों और महिलाओं के बारे में आवाज उठाई.वे आव्हान करते थे कि शिक्षा, संगठन और संघर्ष से ही दलित समाज आगे बढ़ सकता है.वे जातिवाद को देश की प्रगति के लिए बाधक मानते थे.उन्होंने भारतीय संविधान के अनुरूप अपने पद का निर्वाह किया.धर्म निरपेक्षता के सिद्धांत पर अटल रहते हुए उन्होंने कभी भी धार्मिक आयोजनों,मन्दिरों में ,पूजा -पाठ में शिरकत नहीं की.

आज देश को ऐसे ही धर्म निरपेक्ष और संविधान की रक्षा करने वाला प्रथम नागरिक और प्रधानमंत्री की जरूरत है.सवाल ये भी है कि क्या  भारत  में प्रथम दलित प्रधानमंत्री भी कभी बन पाएगा? ये एक यक्ष  प्रश्न है.

 

 

 

 

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